रांची, झारखंड। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद निशिकांत दुबे द्वारा संसद में संथाल परगना को अलग राज्य बनाने और झारखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग ने राज्य के राजनीतिक दलों में तीव्र आक्रोश उत्पन्न किया है। मामले पर कांग्रेस नेता और पौड़ैयाहाट विधान सभा से विधायक प्रदीप यादव ने इस मांग को झारखंड के लोगों के संघर्ष और बलिदान का अपमान बताते हुए, विपक्षी दलों ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया है।
झारखंड राज्य का गठन एक लंबे और कठिन संघर्ष के बाद हुआ था, जिसमें आदिवासियों और अन्य समुदायों ने अपनी पहचान और अधिकारों के लिए कई आंदोलन किए।
पौड़ैयाहाट विधान सभा से विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि दुबे का बयान उन हजारों लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है, जिन्होंने झारखंड राज्य के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनका यह भी आरोप है कि भाजपा, सत्ता से बाहर होने के बाद, राज्य को विभाजित करने की साजिश रच रही है।
इस मांग को झारखंड की एकता और अखंडता पर सीधा प्रहार बताते हुए, प्रदीप यादव ने भाजपा और आरएसएस के इस प्रयास की कड़ी निंदा की है और झारखंड की जनता से एकता बनाए रखने की अपील की है।
निशिकांत दुबे ने अपने तर्क में संथाल परगना में बढ़ती बांग्लादेशी घुसपैठ और मुस्लिम आबादी का उल्लेख किया है, जिससे आदिवासियों की सीटें कम होने का खतरा है। उन्होंने इस क्षेत्र को एक अलग प्रदेश बनाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, झारखंड के राजनीतिक दलों ने उनके इस तर्क को खारिज करते हुए इसे एक राजनीतिक साजिश बताया है, जिससे राज्य में तनाव बढ़ गया है।
- राजीव कुमार, ग्राम समाचार रांची।
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