मोहाली में किसान नेता हिरासत में, शंभू सीमा पुलिस ने खाली कराई, MSP की मांग पर तनाव बरकरार

मोहाली/शंभू: पंजाब पुलिस ने 19 मार्च 2025 को एक केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद शंभू सीमा की ओर जा रहे एक दर्जन से अधिक किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में सरवन सिंह पंढेर और जगजीत सिंह डल्लेवाल शामिल हैं। किसान पिछले साल 13 फरवरी से शंभू और खनौरी सीमा बिंदुओं पर अपनी फसलों के लिए गारंटीकृत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

हिरासत का विवरण:

  • सरवन सिंह पंढेर को जीरकपुर बैरियर पर हिरासत में लिया गया और पटियाला के बहादुरगढ़ कमांडो पुलिस प्रशिक्षण केंद्र ले जाया गया।
  • जगजीत सिंह डल्लेवाल को एम्बुलेंस में ले जाते समय हिरासत में लिया गया।
  • पुलिस ने पंजाब-हरियाणा शंभू और खनौरी सीमाओं से किसानों को हटा दिया और अस्थायी ढांचों को ध्वस्त कर दिया।
  • किसान नेता गुरमनीत सिंह मंगत ने मोहाली में भारी बैरिकेडिंग की सूचना दी।
  • हिरासत में लिए गए अन्य नेताओं में अभिमन्यु कोहर, काका सिंह कोटरा और मंजीत सिंह राय शामिल हैं।
  • खनौरी सीमा पर किसानों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, नारे लगाए और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को पुलिस को बेदखल करने से रोकने के लिए पार्क किया।
  • क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं।

प्रतिक्रियाएं:

  • पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि किसानों को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करना चाहिए क्योंकि उनकी मांगें केंद्र सरकार के खिलाफ हैं। उन्होंने पंजाब में रोजगार और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए शंभू और खनौरी सीमाओं को फिर से खोलने की सरकार की इच्छा पर जोर दिया, जो लंबे समय तक बंद रहने से प्रभावित हुए हैं।
  • विपक्षी नेताओं ने आप सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने हिरासत को कृषि क्षेत्र पर "हमला" बताया, जबकि अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने हिरासत को अलोकतांत्रिक और किसान नेताओं के साथ विश्वासघात बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।

केंद्र के साथ बातचीत:

  • किसान नेताओं और एक केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के बीच हाल ही में हुई बैठक अनिर्णायक रही। केंद्रीय मंत्री चौहान ने घोषणा की कि अगली बैठक 4 मई को होगी, उन्होंने जोर देकर कहा कि बातचीत सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक तरीके से जारी रहेगी।

किसानों का रुख:

किसान नेता MSP की कानूनी गारंटी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की अपनी मांगों पर अडिग हैं। उनका कहना है कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करने में विफल रही है, जिसके कारण उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

आम जनता का प्रभाव:

शंभू और खनौरी सीमाओं के बंद होने से पंजाब और हरियाणा के बीच व्यापार और आवाजाही प्रभावित हुई है। स्थानीय व्यापारियों और आम जनता को दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

आगे की स्थिति:

किसानों और सरकार के बीच तनाव बरकरार है। किसानों ने अपनी मांगों को पूरा होने तक विरोध जारी रखने की बात कही है। सरकार ने बातचीत जारी रखने की बात कही है, लेकिन किसानों की गिरफ्तारी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

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