Bhagalpur news:गिले-शिकवे मिटाकर एक-दूसरे के करीब आना सीखाता है ईद : सैयद हसन


ग्राम समाचार, भागलपुर। खानकाह पीर दमड़िया शाह के सज्जादानशीं मौलाना सैयद शाह आलम हसन ने ईद-उल-फितर के मौके पर देश के तमाम लोगों, खासतौर पर बिहार और भागलपुर के लोगों को दिल की गहराइयों से ईद की मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि अल्लाह के फज़ल और करम से पूरा महीना सब्र, इस्तेक़ामत, हमदर्दी और बराबरी का रहा। जिसमें हम सबने मिल-बैठकर इफ्तार किया और सब्र के साथ रोज़े रखे। अब अल्लाह तआला, जो पूरी कायनात का ख़ालिक़ (सृजनकर्ता), पैदा करने वाला और रोज़ी देने वाला है, उसने हमें ईद की यह खुशी अता की है। यह दिन हमें सिखाता है कि हम अपने तमाम गिले-शिकवे मिटाकर एक-दूसरे के करीब आएं, गले मिलें और बराबरी, हमदर्दी, भाईचारे, मुहब्बत, एकता और अख़ुवत (भ्रातृत्व) का पैग़ाम आम करें। अल्लाह के नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का फरमान है कि “वह शख्स मुसलमान नहीं, वह शख्स मुसलमान नहीं, जिसका पड़ोसी उसके शर (बुराई) से महफूज़ (सुरक्षित) न हो।“ हमें दीनी और अख़लाकी (नैतिक) तौर पर यह सिखाया गया है कि मुकम्मल ईमान वाला और सच्चा मुसलमान वही है, जिससे उसका पड़ोसी, चाहे किसी भी धर्म, जाति या वर्ग से हो, पूरी तरह महफूज़ महसूस करे। जब इस्लाम ने हमें आपसी मोहब्बत और भाईचारे का इतना ख़्याल रखने की तालीम दी है, तो हमें चाहिए कि हम जलन, नफरत, दुश्मनी और अदावत को खत्म कर दें और एक-दूसरे को अपनी खुशियों में शामिल करें। आइए, हम सब सच्चे दिल से तौबा करें और अपनी बाकी की ज़िंदगी अल्लाह और उसके रसूल हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की इताअत (आज्ञा पालन) में गुजारने का अहद (संकल्प) करें।

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Editor - Bijay shankar

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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